UP BOARD CLASS 10 HINDI:पद्यांश आधारित प्रश्नोत्तर

UP Board Class 10 – Hindi Padhyansh Solutions

विकल्प 1: रसखान का सवैया

पद्यांश:
मोर-पखा सिर ऊपर राखिहौं, गुंज की माल गरे पहिरौंगी।
ओढ़ि पीताम्बर लै लकुटी, वन गोधन ग्वारन संग फिरौंगी।।
भावतो सोहि मेरो रसखान, सो तेरे कहें सब स्वांग करौंगी।
या मुरली मुरलीधर की अधरान धरी अधरा न धरौंगी।।

(i) संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के काव्य-खंड में संकलित एवं कृष्ण-भक्त कवि रसखान द्वारा रचित ‘सवैया’ शीर्षक से उद्धृत है।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या:
व्याख्या: रसखान कवि के अनुसार, एक गोपी अपनी सखी से कहती है कि मुझे वे कृष्ण इतने प्रिय हैं कि उनके प्रेम के वश में होकर मैं तुम्हारे कहने पर उनके सभी रूप धारण करने को तैयार हूँ। मैं सिर पर मोरपंख लगाऊँगी और गले में गुंज की माला भी पहनूँगी। परंतु, कृष्ण के होठों पर रखी रहने वाली उस मुरली को मैं अपने होठों पर कभी नहीं रखूँगी, क्योंकि यह मुरली मुझे मेरे प्रिय कृष्ण से दूर रखती है (सौतिया डाह के कारण)।

(iii) प्रश्नोत्तर: गोपियों ने कृष्ण के वियोग में उनके रूप जैसे मोरपंख धारण करना, गुंज की माला पहनना, पीताम्बर ओढ़ना और लाठी लेकर गायों के पीछे घूमने वाली लीलाओं का अनुकरण करना चाहा है।


विकल्प 2: सूरदास का पद (अथवा)

पद्यांश:
ऊधौ मोहि ब्रज विसरत नाहीं।
वृन्दावन गोकुल वन उपवन सघन कुंज की छाही।।
प्रात समय जसुमति अरु नंद देखि सुख पावत।
माखन रोटी दह्यो सजायौ, अति हित साथ खवावत।।
गोपी ग्वाल बाल संग खेलत, सब दिन हंसत सिरात।
सूरदास धनि धनि ब्रजवासी, जिनसो हित जदुनाथ।।

(i) संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के काव्य-खंड में संकलित एवं महाकवि सूरदास द्वारा रचित ‘सूरसागर’ महाकाव्य के ‘पद’ शीर्षक से उद्धृत है।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या:
व्याख्या: श्रीकृष्ण उद्धव से कहते हैं कि ब्रज में गोपियों और ग्वाल-बालों के साथ खेलते हुए मेरे जीवन के दिन हँसते-खेलते और अत्यंत सुख के साथ बीत जाते थे। सूरदास जी कहते हैं कि वे ब्रज के निवासी अत्यंत धन्य हैं, जिनका हित (भला) चाहने वाले स्वयं भगवान श्रीकृष्ण (जदुनाथ) हैं और वे उनका निरंतर स्मरण करते हैं।

(iii) प्रश्नोत्तर: श्रीकृष्ण को ब्रज के वृन्दावन-गोकुल के वन, घनी कुंजों की छाया, माता यशोदा और नंद बाबा का स्नेह तथा सखाओं के साथ बिताया गया समय विस्मृत नहीं होता है।