भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी 2026
रक्षा, दुर्लभ खनिज और एआई क्षेत्र में नए युग की शुरुआत
नई दिल्ली, 21 फरवरी 2026: प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा के बीच हुई ऐतिहासिक मुलाकात ने दोनों देशों के बीच सहयोग के नए द्वार खोल दिए हैं। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य केंद्र $20 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य और ‘ग्लोबल साउथ’ का नेतृत्व रहा है।
1. रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ का विस्तार
रक्षा क्षेत्र में भारत और ब्राजील अब “क्रेता-विक्रेता” के पुराने मॉडल को छोड़कर “सह-उत्पादन” पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
- Embraer C-390 Millennium: ब्राजील की एम्ब्रेयर और भारतीय कंपनियों के बीच मध्यम परिवहन विमान (MTA) के निर्माण के लिए समझौता हुआ है। ये विमान भारत में ही असेंबल किए जाएंगे।
- ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात: ब्राजील ने भारत की सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है, जिससे भारत के रक्षा निर्यात को मजबूती मिलेगी।
- नौसैनिक सहयोग: स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों के रखरखाव और तकनीकी आदान-प्रदान के लिए विशेष सेल का गठन।
2. इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: तकनीकी क्रांति
फरवरी 2026 में दिल्ली में संपन्न हुए एआई समिट में ब्राजील ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को अपनाने का संकल्प लिया।
| पहल | विवरण |
|---|---|
| Sovereign AI | भारत अपना एआई स्टैक ब्राजील के साथ साझा करेगा ताकि डेटा संप्रभुता बनी रहे। |
| भाषिणी एआई | पुर्तगाली और भारतीय भाषाओं के बीच रीयल-टाइम अनुवाद के लिए एआई टूल। |
| Agri-Tech | फसल भविष्यवाणी के लिए उपग्रह डेटा आधारित साझा एआई मॉडल। |
3. दुर्लभ खनिज और ऊर्जा सुरक्षा
आधुनिक तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए ‘लिथियम’ और ‘कोबाल्ट’ जैसे दुर्लभ खनिज अनिवार्य हैं।
ब्राजील के पास मौजूद विशाल खनिजों के भंडार तक भारत की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ‘लिथियम कॉरिडोर’ समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। भारतीय कंपनी KABIL ब्राजील की खदानों में रणनीतिक निवेश करेगी।
4. $20 बिलियन का व्यापारिक रोडमैप
दोनों नेताओं ने अगले पांच वर्षों में आपसी व्यापार को $20 अरब तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इसमें कृषि, स्टील, माइनिंग और डिजिटल सेवाओं का सबसे बड़ा योगदान होगा। व्यापार को आसान बनाने के लिए 5-वर्षीय बिजनेस वीजा को बढ़ाकर 10 वर्ष करने का प्रस्ताव भी दिया गया है।
निष्कर्ष
भारत और ब्राजील की यह साझेदारी चीन पर निर्भरता कम करने और ‘ग्लोबल साउथ’ को एक मजबूत विकल्प देने की दिशा में बड़ा कदम है। चाहे वह रक्षा विमानों का निर्माण हो या एआई के नैतिक नियम, दोनों देश अब एक-दूसरे के पूरक बन चुके हैं।