वस्तुनिष्ठ प्रश्न – खण्ड ‘अ‘
विषय: हिन्दी | पूर्णांक: 20
| स्तम्भ A | स्तम्भ B |
|---|---|
| (i) मैला ऑचल | (ख) फणीश्वर नाथ ‘रेणु‘ |
| (ii) चित्रलेखा | (ग) भगवती चरण वर्मा |
| (iii) उसने कहा था | (घ) चन्द्र धर शर्मा गुलेरी |
| (iv) कफन | (क) प्रेमचन्द्र |
(i) सेवासदन, (ii) विराटा की पद्मिनी, (iv) चित्रलेखा
उत्तर: (ब्) (i), (ii) और (iv)प्रश्न संख्या-7: कण्ठस्थ श्लोक
अपनी पाठ्य पुस्तक से लिया गया एक श्लोक जो प्रश्नपत्र में न आया हो:
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥
कौपीनं यत्र कौशेयं सा काशी केन मीयते ॥
संस्कृत प्रश्नोत्तर (उत्तर-कुञ्जी)
(i) भारतीय संस्कृत मूलम् किम् अस्ति?
उत्तरम्: विश्वस्य स्रष्टा ईश्वरः एकः एव अस्ति इति भारतीय संस्कृतेः मूलम् अस्ति।
(ii) का संस्कृतिः सदा गतिशीला वर्तते?
उत्तरम्: भारतीय संस्कृतिः सदा गतिशीला वर्तते।
(iii) पुरूराजः केन सह युद्धम् अकरोत्?
उत्तरम्: पुरूराजः अलक्षेन्द्रेण (सिकन्दरेण) सह युद्धम् अकरोत्।
(iv) चन्द्रशेखरः कः आसीत्?
उत्तरम्: चन्द्रशेखरः एकः प्रसिद्धः क्रान्तिकारी देशभक्तः च आसीत्।
परीक्षा में आपको केवल किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लिखने होंगे।
प्रश्न 9:निम्नलिखित में से किसी एक पर निबंध लिखिये
(I) पर्यावरण प्रदूषण
(ii) विज्ञान: वरदान या अभिशाप
(iii) यातायात के नियम
(iv) जनसंख्या:लाभ या हानि
पर्यावरण प्रदूषण: समस्या और समाधान
“प्रकृति का न करें हरण, बचाएँ अपना पर्यावरण”
1. प्रस्तावना
प्राकृतिक संतुलन में दोष पैदा होना ही प्रदूषण कहलाता है। पर्यावरण दो शब्दों से मिलकर बना है— ‘परि’ और ‘आवरण’, जिसका अर्थ है हमारे चारों ओर का घेरा। आज विज्ञान के युग में जहाँ मानव ने अनेक सुख-सुविधाएँ विकसित की हैं, वहीं पर्यावरण प्रदूषण जैसी एक भयानक समस्या को भी जन्म दिया है। यह समस्या न केवल भारत की, बल्कि पूरी दुनिया की सबसे बड़ी चिंता बन गई है।
2. प्रदूषण के प्रमुख प्रकार
प्रदूषण मुख्य रूप से निम्नलिखित रूपों में हमारे जीवन को प्रभावित कर रहा है:
- वायु प्रदूषण: कारखानों की चिमनियों और वाहनों से निकलने वाले धुएँ के कारण हवा में जहरीली गैसें मिल जाती हैं, जिससे साँस की बीमारियाँ बढ़ रही हैं।
- जल प्रदूषण: उद्योगों का कचरा और गंदा पानी नदियों में मिलने से जल विषैला हो रहा है, जिससे जलीय जीव मर रहे हैं और पीने के पानी की किल्लत हो रही है।
- ध्वनि प्रदूषण: लाउडस्पीकरों, मशीनों और वाहनों के शोर से बहरापन और तनाव जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।
- मृदा प्रदूषण: रासायनिक खादों और प्लास्टिक के कचरे से धरती की उपजाऊ शक्ति नष्ट हो रही है।
3. प्रदूषण के कारण
प्रदूषण के बढ़ने के कई कारण हैं:
- तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या।
- वनों की अंधाधुंध कटाई।
- बढ़ता हुआ औद्योगीकरण और शहरीकरण।
- प्लास्टिक और हानिकारक रसायनों का अत्यधिक उपयोग।
4. प्रदूषण के प्रभाव
प्रदूषण के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है (ग्लोबल वार्मिंग), जिससे ग्लेशियर पिघल रहे हैं। नई-नई बीमारियाँ जन्म ले रही हैं और पारिस्थितिक तंत्र का संतुलन बिगड़ रहा है। यदि इसे समय पर नहीं रोका गया, तो भविष्य में जीवन का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
5. समाधान के उपाय
इस समस्या से निपटने के लिए हमें सामूहिक प्रयास करने होंगे:
- अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना।
- सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ ईंधन का प्रयोग बढ़ाना।
- प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना।
- गंदे पानी को नदियों में छोड़ने से पहले उपचारित (Filter) करना।
- जन-जागरूकता अभियान चलाना।
6. उपसंहार
पर्यावरण प्रदूषण एक वैश्विक चुनौती है। सरकार नियम तो बनाती है, लेकिन जब तक प्रत्येक नागरिक जागरूक नहीं होगा, तब तक हम अपनी धरती को स्वच्छ नहीं बना सकते। हमें अपनी भावी पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और हरा-भरा वातावरण छोड़कर जाना होगा।
विज्ञान: वरदान या अभिशाप

विज्ञान: वरदान या अभिशाप
विज्ञान: वरदान या अभिशाप
“विज्ञान सत्य की खोज है, जिसका उपयोग मानवता के कल्याण के लिए होना चाहिए।”
1. प्रस्तावना
आज का युग **विज्ञान का युग** है। मानव सभ्यता के विकास में विज्ञान ने जो भूमिका निभाई है, वह अद्वितीय है। आज हम सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक पूरी तरह विज्ञान द्वारा निर्मित वस्तुओं पर निर्भर हैं। विज्ञान ने असंभव को संभव कर दिखाया है। परंतु सिक्के के दो पहलुओं की तरह, विज्ञान के जहाँ अनेक लाभ हैं, वहीं इसके दुरुपयोग के परिणाम अत्यंत विनाशकारी भी हो सकते हैं।
— डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
विज्ञान: एक वरदान
- यातायात: लंबी यात्राएँ जो महीनों में पूरी होती थीं, अब हवाई जहाज से चंद घंटों में पूरी हो जाती हैं।
- चिकित्सा: जटिल रोगों का इलाज अब संभव है। एक्स-रे, लेजर और नई औषधियों ने मानव को दीर्घायु प्रदान की है।
- संचार: इंटरनेट और स्मार्टफोन ने पूरी दुनिया को एक ‘ग्लोबल विलेज’ बना दिया है।
- मनोरंजन: टेलीविजन, सिनेमा और कंप्यूटर ने मनोरंजन के क्षेत्र में क्रांति ला दी है।
विज्ञान: एक अभिशाप
- विनाशकारी हथियार: परमाणु बम और मिसाइलों के निर्माण ने पूरी दुनिया को विनाश के कगार पर खड़ा कर दिया है।
- प्रदूषण: बढ़ते औद्योगीकरण ने वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण फैलाकर पर्यावरण को नष्ट कर दिया है।
- बेरोजगारी: मशीनों और AI के बढ़ते प्रयोग से मानवीय श्रम की महत्ता कम हुई है, जिससे बेरोजगारी बढ़ी है।
- स्वास्थ्य: मोबाइल और गैजेट्स के अत्यधिक प्रयोग से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
2. विज्ञान की सार्थकता
वास्तव में, विज्ञान अपने आप में न तो वरदान है और न ही अभिशाप। यह केवल एक **साधन** है। इसका उपयोग कैसे किया जाए, यह पूरी तरह मानव के विवेक पर निर्भर करता है। यदि हम विज्ञान का उपयोग बिजली बनाने या कृषि उत्पादन बढ़ाने में करते हैं, तो यह वरदान है। परंतु यदि हम इसका उपयोग निर्दोष लोगों की जान लेने वाले हथियारों के निर्माण में करते हैं, तो यह अभिशाप बन जाता है।
3. उपसंहार
अंत में हम कह सकते हैं कि विज्ञान **’एक अच्छा सेवक है, परंतु एक बुरा स्वामी’**। यदि मनुष्य विज्ञान को अपना स्वामी मान लेगा और उसके पीछे अंधा होकर भागेगा, तो विनाश निश्चित है। लेकिन यदि मानव अपने नैतिक मूल्यों और बुद्धि का उपयोग करते हुए इसे जन-कल्याण के लिए अपना सेवक बनाकर रखेगा, तो यह धरती स्वर्ग बन जाएगी। हमें विज्ञान का उपयोग संहार के लिए नहीं, बल्कि निर्माण के लिए करना चाहिए।
(iii) यातायात के नियम

यातायात के नियम: सुरक्षित जीवन का आधार
आज के भागदौड़ भरे जीवन में सड़क यातायात हमारे दैनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन गया है। सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या ने जहाँ यात्रा को सुगम बनाया है, वहीं दुर्घटनाओं के खतरे को भी बढ़ा दिया है। ऐसी स्थिति में, यातायात के नियमों का पालन करना केवल कानूनी मजबूरी नहीं, बल्कि हमारे स्वयं के जीवन की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
नियमों का महत्व और आवश्यकता
सड़क सुरक्षा के नियम हमें अनुशासित बनाते हैं और सड़क पर होने वाली अराजकता को कम करते हैं। जब हम यातायात के संकेतों और नियमों की अनदेखी करते हैं, तो हम न केवल अपनी जान जोखिम में डालते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी खतरा पैदा करते हैं। अधिकांश सड़क हादसे मानवीय भूल, अत्यधिक गति और लापरवाही का परिणाम होते हैं, जिन्हें थोड़े से संयम और जागरूकता से रोका जा सकता है।
प्रमुख यातायात नियम
- सिग्नल का पालन: लाल बत्ती पर रुकना, पीली पर प्रतीक्षा करना और हरी बत्ती होने पर ही आगे बढ़ना प्राथमिक नियम है।
- सुरक्षा उपकरण: दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट और चार पहिया वाहन चलाने वालों के लिए सीट बेल्ट जीवन रक्षक कवच की तरह कार्य करते हैं।
- लेन और गति सीमा: हमेशा अपनी निर्धारित लेन में चलें और सड़क पर दर्शाई गई गति सीमा (Speed Limit) का उल्लंघन न करें।
- नशा और ड्राइविंग: नशे की हालत में वाहन चलाना न केवल दंडनीय अपराध है, बल्कि यह एक आत्मघाती कदम भी है।
- मोबाइल का प्रयोग: वाहन चलाते समय फोन पर बात करना या मैसेज देखना ध्यान भटकाने का सबसे बड़ा कारण है।
निष्कर्ष
यातायात के नियम हमारी सुविधा और सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमारा यह कर्तव्य है कि हम इन नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करें। हमें यह समझना होगा कि घर पर कोई हमारा इंतजार कर रहा है। ‘जल्दी पहुँचने’ की होड़ में अपनी और दूसरों की जान को दांव पर लगाना बुद्धिमानी नहीं है। याद रखें, सड़क सुरक्षा एक सामूहिक जिम्मेदारी है।
जनसंख्या:लाभ या हानि

जनसंख्या: एक वरदान या अभिशाप
“संसाधन सीमित हैं, लेकिन उपभोग करने वाले असीमित”
प्रस्तावना
किसी भी देश की असली शक्ति उसकी जनसंख्या होती है। आज भारत विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन चुका है। बढ़ती जनसंख्या को अक्सर एक गंभीर समस्या के रूप में देखा जाता है, लेकिन यदि इसका सही प्रबंधन किया जाए, तो यह देश के विकास का इंजन भी बन सकती है। यह विषय ‘सिक्के के दो पहलुओं’ की तरह है, जिसके लाभ और हानि दोनों हैं।
जनसंख्या के लाभ (वरदान)
विशाल जनसंख्या का अर्थ है—विशाल कार्यबल। भारत जैसे युवा देश के पास ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ है, जिससे उत्पादन और नवाचार को बढ़ावा मिलता है। अधिक लोग अधिक मांग पैदा करते हैं, जिससे बाजार बड़ा होता है और अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। हमारी सेना और तकनीकी क्षेत्र में मानव शक्ति की अधिकता हमें वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाती है।
जनसंख्या की हानि (अभिशाप)
अत्यधिक जनसंख्या संसाधनों पर भारी दबाव डालती है। भोजन, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा की कमी एक बड़ी चुनौती बन जाती है। इससे बेरोजगारी, गरीबी और अपराध में वृद्धि होती है। साथ ही, प्रदूषण और वनों की कटाई जैसी पर्यावरणीय समस्याएँ भी इसी का परिणाम हैं। जब जनसंख्या संसाधनों से अधिक हो जाती है, तो विकास की गति धीमी पड़ जाती है।
निष्कर्ष
प्रश्न 10:उत्तर मध्य को एक ऐसा शिकायती पत्र लिखिये जिसमें ट्रेन में साफ़ सफाई और सुविधाएं उपलब्ध न होने का उल्लेख हो अथवा अपनी रूचियों का उल्लेख करते हुये अपने मित्र को पत्र लिखिए
महाप्रबंधक,
उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज।
महोदय,
मैं आपका ध्यान ट्रेन संख्या [नंबर दर्ज करें] के कोच [कोच नंबर] में व्याप्त अव्यवस्था की ओर दिलाना चाहता हूँ। दिनांक [तारीख] की यात्रा के दौरान मुझे निम्नलिखित असुविधाएँ हुईं:
- शौचालयों में अत्यधिक गंदगी और दुर्गंध।
- कोच में पानी की अनुपलब्धता।
- सीटों के पास कचरे का ढेर और सफाईकर्मी की अनुपस्थिति।
रेलवे से बेहतर सुविधा की अपेक्षा है, किंतु इस अनुभव ने निराश किया है। कृपया इस पर उचित कार्रवाई करें।
आपके मित्र के लिए आपकी रुचियों (Hobbies) का उल्लेख करते हुए एक अनौपचारिक पत्र (Informal Letter)
16 फरवरी, 2026
सप्रेम नमस्ते। आशा है कि तुम वहाँ सकुशल होगे। तुम्हारा पिछला पत्र मिला, यह जानकर खुशी हुई कि तुमने अपनी परीक्षाओं में शानदार सफलता हासिल की है।
तुमने मुझसे पूछा था कि आजकल मैं अपने खाली समय में क्या कर रहा हूँ। मित्र, इन दिनों मैंने अपनी कुछ पुरानी रुचियों को फिर से जीना शुरू किया है। पढ़ाई के दबाव के बीच ये रुचियाँ मुझे मानसिक शांति देती हैं। आजकल मेरा झुकाव इन गतिविधियों की ओर अधिक है:
• प्रकृति की फोटोग्राफी करना
• शाम को गिटार का अभ्यास करना
विशेषकर फोटोग्राफी ने मुझे दुनिया को एक नए नजरिए से देखना सिखाया है। जब भी मैं किसी सुंदर दृश्य को कैमरे में कैद करता हूँ, तो मुझे अपार खुशी मिलती है। मुझे यकीन है कि तुमने भी कुछ नया सीखना शुरू किया होगा। मुझे पत्र लिखकर अपनी पसंद के बारे में जरूर बताना।
चाचा जी और चाची जी को मेरा सादर प्रणाम कहना और छोटी बहन को ढेर सारा प्यार देना।