निम्नलिखित गद्यांशों पर आधारित तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(i) संदर्भ लिखिए :

प्रस्तुत गद्यांश ‘भारत की सांस्कृतिक एकता’ पाठ से लिया गया है। इसके लेखक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हैं। इस पाठ में लेखक ने भारतीय संस्कृति की विविधता तथा उसकी मूल एकता का वर्णन किया है

(ii) लेखक ने भारतीय संस्कृति को अनेक देशों का समूह क्यों कहा है?

लेखक ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि भारत में अनेक धर्मों, जातियों, भाषाओं और सम्प्रदायों के लोग निवास करते हैं। यहाँ बोलियों और धर्मों की इतनी अधिक विविधता है कि ऊपर से देखने पर यह देश अनेक देशों का समूह प्रतीत होता है।

(iii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए :रेखांकित अंश —

इन विभिन्नताओं को देखकर अगर अपरिचित आदमी घबराकर कह उठे कि यह एक देश नहीं, अनेक देशों का एक समूह है; यह एक जाति नहीं, अनेक जातियों का एक समूह है तो इसमें आश्चर्य की बात नहीं।

✍️ व्याख्या :

लेखक का आशय है कि भारत में अनेक धर्म, भाषाएँ, जातियाँ और सम्प्रदाय पाए जाते हैं। इन विविधताओं को देखकर कोई अनजान या बाहरी व्यक्ति घबरा सकता है और यह सोच सकता है कि यह एक देश नहीं, बल्कि कई देशों का समूह है। उसे ऐसा लग सकता है कि यहाँ एक ही जाति नहीं बल्कि अनेक जातियों का अलग-अलग समाज है।लेखक कहना चाहता है कि यदि कोई व्यक्ति केवल बाहरी रूप देखकर ऐसा निष्कर्ष निकाले तो इसमें आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि सतही दृष्टि से देखने पर विविधता ही दिखाई देती है।

(i) उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए।

संदर्भ :प्रस्तुत गद्यांश ‘संस्कृति और साहित्य’ पाठ से लिया गया है। इसके लेखक रामधारी सिंह दिनकर हैं। इस पाठ में लेखक ने साहित्य की प्रगतिशील प्रवृत्ति तथा उसके परिवर्तनशील स्वरूप का वर्णन किया है

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
हिन्दी में प्रगतिशील साहित्य का निर्माण हो रहा है। उसके निर्माता यह समझ रहे हैं कि उनके साहित्य में भविष्य का गौरव निहित है। पर कुछ ही समय के बाद उनका यह साहित्य भी अतीत का स्मारक हो जायेगा।”

व्याख्या :लेखक का आशय है कि वर्तमान समय में हिन्दी में जो नया और प्रगतिशील साहित्य लिखा जा रहा है, उसके रचनाकार यह मानते हैं कि उनका साहित्य भविष्य में बहुत सम्मान और महत्त्व प्राप्त करेगा। उन्हें विश्वास है कि उनके विचार समाज को नई दिशा देंगे और आने वाला समय उनके साहित्य को गौरवपूर्ण मानेगा।लेकिन लेखक यह भी स्पष्ट करता है कि समय के साथ सब बदल जाता है। जो साहित्य आज नया और आधुनिक माना जा रहा है, वही कुछ समय बाद पुराना होकर इतिहास का हिस्सा बन जाएगा। इस प्रकार साहित्य निरंतर परिवर्तनशील है और हर युग का साहित्य अंततः अतीत बन जाता है।

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