प्रश्न 3 और 4:संस्कृत खण्ड: संदर्भ एवं अनुवाद

संस्कृत अनुवाद – प्रश्न पत्र हल

संस्कृत खण्ड: संदर्भ एवं अनुवाद

प्रश्न-3 (प्रथम गद्यांश)
“इयं नगरी विविध धर्माणां संगम स्थली… अत्रव्यः कौशेया शाटिकाः देशे देशे सर्वत्र स्पृहान्ते।”

संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के ‘संस्कृत खण्ड’ में संकलित ‘वाराणसी’ पाठ से उद्धृत है।

हिन्दी अनुवाद: यह नगरी (वाराणसी) विविध धर्मों की संगम स्थली है। महात्मा बुद्ध, तीर्थंकर पार्श्वनाथ, शंकराचार्य, कबीर, गोस्वामी तुलसीदास और अन्य बहुत से महात्माओं ने यहाँ आकर अपने विचारों का प्रसार किया। न केवल दर्शन, साहित्य और धर्म में, बल्कि कला के क्षेत्र में भी यह नगरी विविध कलाओं और शिल्पों के लिए लोक में प्रसिद्ध है। यहाँ की रेशमी साड़ियाँ देश-देश में सभी जगह पसंद की जाती हैं।
प्रश्न-3 (अथवा – भारतीय संस्कृति)
“अस्माकं संस्कृतिः सदा गतिशीला वर्तते… आचारे दृढ़ता चेति।”

संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के ‘संस्कृत खण्ड’ के ‘भारतीय संस्कृतिः’ पाठ से लिया गया है।

हिन्दी अनुवाद: हमारी संस्कृति सदा गतिशील है। मानव जीवन को संस्कारित करने के लिए यह समय-समय पर नई-नई विचारधाराओं को स्वीकार करती है और नई शक्ति प्राप्त करती है। इसमें दुराग्रह (हठ) नहीं है; जो युक्तियुक्त और कल्याणकारी है, वह यहाँ हर्ष के साथ स्वीकार किया जाता है। इसकी गतिशीलता का रहस्य मानव जीवन के शाश्वत मूल्यों में निहित है, जैसे सत्य की प्रतिष्ठा, सभी प्राणियों में समान भाव, विचारों में उदारता और आचरण में दृढ़ता।
प्रश्न-4 (प्रथम पद्यांश – श्लोक)
माता गुरूतरा भूमेः खात् पितोच्चतरस्तथा।
मनः शीघ्रतरं वातात चिन्ता बहुतरी तृणात।।

संदर्भ: यह श्लोक ‘संस्कृत खण्ड’ के ‘जीवन-सूत्राणि’ पाठ से लिया गया है।

हिन्दी अनुवाद: माता भूमि से अधिक भारी (गौरवशाली) है; पिता आकाश से भी ऊँचा है। मन वायु से भी अधिक तीव्रगामी है और चिन्ता तिनके से भी अधिक (जलाने वाली/असंख्य) होती है।
प्रश्न-4 (अथवा – प्रहेलिका)
अपदो दूरगामी च साक्षरो न च पण्डितः।
अमुखः स्फुटवक्ता च यो जानाति स पण्डितः।।

संदर्भ: यह पद्यांश ‘संस्कृत खण्ड’ के ‘प्रबुद्धो ग्रामीणः’ पाठ से उद्धृत है।

हिन्दी अनुवाद: बिना पैरों का है पर दूर तक जाता है; अक्षरों से युक्त (साक्षर) है पर पण्डित नहीं है। बिना मुख का है पर स्पष्ट बोलने वाला है; जो इसे जानता है, वही पण्डित है। (उत्तर: पत्र)

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