
होली 2026: तिथि, मुहूर्त और पावन कथा
वर्ष 2026 की होली आध्यात्मिक और खगोलीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस वर्ष होलिका दहन के दिन ही चंद्र ग्रहण का संयोग बन रहा है।
🗓️ महत्वपूर्ण तिथियां और समय
| आयोजन | तिथि | शुभ मुहूर्त / समय |
|---|---|---|
| होलिका दहन | 3 मार्च, 2026 | शाम 06:47 से रात 08:50 तक |
| धुलंडी (रंग वाली होली) | 4 मार्च, 2026 | पूरा दिन |
| चंद्र ग्रहण समाप्ति | 3 मार्च, 2026 | शाम 06:47 बजे (IST) |
📜 होली की पौराणिक कथा (Story of Holi)
होली का त्यौहार केवल रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। इसकी सबसे प्रचलित कथा भक्त प्रहलाद और उनकी बुआ होलिका से जुड़ी है:
प्राचीन काल में हिरण्यकशिपु नाम का एक अत्यंत अहंकारी राजा था। वह स्वयं को भगवान मानता था और चाहता था कि हर कोई उसकी पूजा करे। लेकिन उसका पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था।
अपने ही पुत्र को विष्णु भक्ति से रोकने के लिए हिरण्यकशिपु ने उसे कई बार मारने का प्रयास किया, लेकिन हर बार भगवान ने प्रहलाद की रक्षा की। अंत में, राजा ने अपनी बहन होलिका की सहायता ली। होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह अग्नि में नहीं जलेगी।
होलिका भक्त प्रहलाद को गोद में लेकर धधकती आग में बैठ गई। लेकिन चमत्कार हुआ—प्रहलाद निरंतर भगवान का नाम जपते रहे और सुरक्षित रहे, जबकि वरदान का दुरुपयोग करने के कारण होलिका जलकर राख हो गई।
तभी से बुराई के अंत की खुशी में ‘होलिका दहन’ किया जाता है और अगले दिन रंगों से उत्सव मनाया जाता है।
✨ होली मनाने का सही तरीका
- प्राकृतिक और गुलाल के रंगों का प्रयोग करें।
- बुराइयों को त्याग कर नए रिश्तों की शुरुआत करें।
- होलिका की अग्नि में अहंकार और ईर्ष्या की आहुति दें।
आप सभी को होली 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🌈
