INS अंजदीप (P73): स्वदेशी स्टील से बना नौसेना का नया ‘ साईलेंट किलर’

INS अंजदीप (P73): भारतीय नौसेना की स्वदेशी शक्ति और तकनीकी विश्लेषण – एक संपूर्ण गाइड

INS अंजदीप (P73): स्वदेशी स्टील और तकनीक का महासंगम

भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होने जा रहा स्वदेशी शक्ति का प्रतीक

1. परिचय और ऐतिहासिक महत्व

भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा रणनीति में INS अंजदीप (P73) का प्रवेश एक नए युग की शुरुआत है। यह जहाज ‘अर्शनाला’ श्रेणी के एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW SWC) प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसका निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा किया गया है।

इस जहाज का नाम कर्नाटक के कारवार के पास स्थित सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘अंजदीप द्वीप’ के नाम पर रखा गया है। यह द्वीप 1961 में गोवा की मुक्ति के दौरान एक महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना रहा था, जो नौसेना के गौरवशाली इतिहास को दर्शाता है।

2. स्वदेशी स्टील की तकनीक (DMR 249A)

INS अंजदीप की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता इसका स्वदेशी स्टील है। भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए विशेष रूप से विकसित DMR 249A ग्रेड स्टील का उपयोग इसके ढांचे में किया गया है।

स्वदेशी स्टील के फायदे:
  • जंग प्रतिरोध: खारे पानी में वर्षों तक रहने के बाद भी इसकी मजबूती बनी रहती है।
  • लागत में कमी: विदेशी स्टील पर निर्भरता खत्म होने से करोड़ों रुपये की बचत होती है।
  • विस्फोट सहनशीलता: यह स्टील अंडरवाटर धमाकों के दबाव को झेलने में सक्षम है।

3. एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW) क्षमताएं

तटीय जल में छिपी हुई पनडुब्बियों का पता लगाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। INS अंजदीप को एक ‘साइलेंट किलर’ के रूप में विकसित किया गया है। इसके प्रोपल्शन सिस्टम में ‘वाटर जेट’ तकनीक का उपयोग किया गया है, जो पारंपरिक पंखों (Propellers) की तुलना में बहुत कम शोर पैदा करता है।

कम शोर होने के कारण, यह दुश्मन की पनडुब्बियों के सोनार को चकमा देने में सक्षम है और स्वयं उनके बेहद करीब पहुँचकर हमला कर सकता है।

4. विस्तृत तकनीकी विनिर्देश

विशेषता (Feature) विवरण (Details)
वजन लगभग 750 टन
लंबाई 77.6 मीटर
अधिकतम गति 25+ नॉट्स
मुख्य हथियार टॉरपीडो, रॉकेट लॉन्चर और 30mm गन
सेंसर हल्स माउंटेड और वेरिएबल डेप्थ सोनार

5. हिंद महासागर में सामरिक महत्व

हिंद महासागर में बढ़ती पनडुब्बी गतिविधियों के बीच, INS अंजदीप भारत की पहली रक्षा पंक्ति का काम करेगा। यह न केवल युद्ध स्थितियों में बल्कि शांति के समय गश्त और समुद्री डकैती रोकने के अभियानों में भी प्रभावी है।

6. आत्मनिर्भर भारत और भविष्य

यह जहाज भारतीय रक्षा उद्योग की क्षमता का प्रमाण है। इसमें इस्तेमाल किए गए 80% उपकरण पूरी तरह स्वदेशी हैं, जो ‘मेक इन इंडिया’ मिशन को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करते हैं।

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