प्रश्न-13 निम्नलिखित विषयों में से किसी एक पर अपनी भाषा-शैली में निबन्ध लिखिए

1.आतंकवाद की समस्या : कारण और निवारण

✦ 1.आतंकवाद की समस्या : कारण और निवारण ✦


“आतंक मानवता का सबसे बड़ा शत्रु है, क्योंकि यह भय के सहारे शासन करना चाहता है।”

वर्तमान युग विज्ञान, तकनीक और विकास का युग कहा जाता है, किंतु इसके साथ अनेक गंभीर चुनौतियाँ भी सामने आई हैं।
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इन चुनौतियों में आतंकवाद सबसे भयावह और विनाशकारी समस्या है। यह केवल किसी एक देश तक सीमित नहीं,बल्कि एक वैश्विक संकट बन चुका है। आतंकवाद समाज में भय, असुरक्षा और अराजकता का वातावरण उत्पन्न करता है।
इसका प्रभाव सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सभी क्षेत्रों पर पड़ता है।
निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना आतंकवाद की सबसे क्रूर विशेषता है।


✦ आतंकवाद का अर्थ ✦


‘आतंकवाद’ शब्द का अर्थ है—आतंक या भय फैलाने की प्रवृत्ति। जब कोई संगठन या समूह ,
अपने राजनीतिक, धार्मिक या वैचारिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हिंसा, धमकी, विस्फोट, अपहरण या हत्या जैसे कृत्यों का सहारा लेता है, तो उसे आतंकवाद कहा जाता है।


“जहाँ भय है, वहाँ स्वतंत्रता नहीं हो सकती।”


✦ आतंकवाद के प्रमुख कारण ✦


  • ✔ राजनीतिक असंतोष और उपेक्षा
  • ✔ धार्मिक कट्टरता और गलत शिक्षाएँ
  • ✔ आर्थिक असमानता और बेरोजगारी
  • ✔ अशिक्षा और जागरूकता की कमी
  • ✔ विदेशी हस्तक्षेप और सीमा विवाद
  • ✔ आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का दुरुपयोग

जब किसी समुदाय को यह महसूस होता है कि उसकी मांगों की अनदेखी की जा रही है, तो कुछ लोग हिंसक मार्ग अपना लेते हैं। धार्मिक उन्माद और कट्टर विचारधारा भी युवाओं को भटकाने का कार्य करती है। गरीबी और बेरोजगारी के कारण भी युवा वर्ग आतंकवादी संगठनों के बहकावे में आ सकता है।


✦ आतंकवाद के दुष्परिणाम ✦


  • ✔ निर्दोष लोगों की जान का नुकसान
  • ✔ समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण
  • ✔ आर्थिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव
  • ✔ पर्यटन और व्यापार में गिरावट
  • ✔ राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द्र को हानि

“हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि नई समस्याओं की शुरुआत है।”

आतंकवाद राष्ट्र की प्रगति को बाधित करता है। सरकार को सुरक्षा व्यवस्था पर अत्यधिक खर्च करना पड़ता है। समाज में अविश्वास और तनाव बढ़ जाता है, जिससे राष्ट्रीय एकता कमजोर पड़ती है।


✦ आतंकवाद का निवारण ✦


  • ✔ गुणवत्तापूर्ण और नैतिक शिक्षा का प्रसार
  • ✔ रोजगार के अवसरों में वृद्धि
  • ✔ कठोर कानून और सशक्त सुरक्षा तंत्र
  • ✔ अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सूचनाओं का आदान-प्रदान
  • ✔ धार्मिक और सामाजिक नेताओं द्वारा शांति का संदेश
  • ✔ मीडिया की जिम्मेदार भूमिका

आतंकवाद जैसी जटिल समस्या का समाधान केवल बल प्रयोग से संभव नहीं है। इसके लिए सामाजिक, आर्थिक और वैचारिक स्तर पर व्यापक प्रयास आवश्यक हैं। युवाओं को सही दिशा, रोजगार और सकारात्मक अवसर प्रदान किए जाएँ, तो वे हिंसा के मार्ग से दूर रहेंगे।


“शांति ही मानवता की सच्ची शक्ति है।”

✦ उपसंहार ✦


निष्कर्षतः, आतंकवाद मानव सभ्यता के लिए एक गंभीर खतरा है। इसे समाप्त करने के लिए सरकार, समाज और प्रत्येक नागरिक को मिलकर कार्य करना होगा। यदि हम एकजुट होकर शांति, सहिष्णुता और भाईचारे का मार्ग अपनाएँ, तो निश्चित ही इस समस्या पर विजय प्राप्त की जा सकती है। भय और घृणा के स्थान पर प्रेम और विश्वास को अपनाकर ही हम एक सुरक्षित और समृद्ध विश्व का निर्माण कर सकते हैं।


2.प्रजातंत्र में विपक्ष की भूमिका

2.प्रजातंत्र में विपक्ष की भूमिका


प्रजातंत्र अर्थात जनता का शासन, जनता के द्वारा और जनता के लिए। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सफलता केवल सत्तारूढ़ दल पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि एक सशक्त और जिम्मेदार विपक्ष पर भी समान रूप से निर्भर करती है। प्रजातंत्र में विपक्ष की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वही सरकार के कार्यों पर निगरानी रखता है और जनता की आवाज़ को संसद या विधानसभाओं तक पहुँचाता है।


विपक्ष का अर्थ


प्रजातंत्र में वह राजनीतिक दल या दलों का समूह जो चुनाव में बहुमत प्राप्त नहीं कर पाता और सत्ता से बाहर रहता है, उसे विपक्ष कहा जाता है। विपक्ष का कार्य केवल सरकार की आलोचना करना नहीं है, बल्कि रचनात्मक सुझाव देना और जनहित के मुद्दों को उठाना भी है।


सरकार पर नियंत्रण


विपक्ष सरकार की नीतियों, योजनाओं और निर्णयों की समीक्षा करता है। यदि सरकार कोई गलत निर्णय लेती है या जनता के हितों की उपेक्षा करती है, तो विपक्ष उसका विरोध करता है। इससे सरकार मनमानी नहीं कर पाती और लोकतांत्रिक संतुलन बना रहता है।


जनता की आवाज़

विपक्ष जनता और सरकार के बीच सेतु का कार्य करता है। जब जनता की समस्याएँ अनसुनी रह जाती हैं, तब विपक्ष उन्हें संसद में उठाता है। प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और बहस के माध्यम से विपक्ष जनता की पीड़ा और मांगों को सामने लाता है।


रचनात्मक आलोचना


स्वस्थ लोकतंत्र के लिए रचनात्मक आलोचना आवश्यक है। विपक्ष सरकार की नीतियों में कमियों को उजागर करता है और बेहतर विकल्प प्रस्तुत करता है। इससे शासन-प्रणाली में सुधार होता है और जनकल्याण को बढ़ावा मिलता है।


वैकल्पिक नेतृत्व


विपक्ष भविष्य की सरकार के रूप में भी कार्य करता है। वह अपनी नीतियों और कार्यक्रमों के माध्यम से जनता के सामने एक विकल्प प्रस्तुत करता है। यदि जनता सरकार से संतुष्ट नहीं होती, तो वह अगले चुनाव में विपक्ष को अवसर दे सकती है।


उपसंहार


निष्कर्षतः, प्रजातंत्र में विपक्ष की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और अनिवार्य है। एक सशक्त, जिम्मेदार और जागरूक विपक्ष लोकतंत्र को मजबूत बनाता है। यदि विपक्ष कमजोर हो जाए, तो सरकार निरंकुश हो सकती है। अतः स्वस्थ लोकतंत्र के लिए आवश्यक है कि विपक्ष ईमानदारी, निष्पक्षता और जनहित की भावना से कार्य करे।

देश में बेरोजगारी की समस्या

✦3. देश में बेरोजगारी की समस्या ✦


“खाली दिमाग शैतान का घर होता है।”

वर्तमान समय में बेरोजगारी हमारे देश की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। यह केवल आर्थिक समस्या ही नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक संकट भी है। जब शिक्षित और योग्य युवा रोजगार से वंचित रह जाते हैं, तो उनके भीतर निराशा और असंतोष जन्म लेता है। बेरोजगारी राष्ट्र की प्रगति को बाधित करती है।


✦ बेरोजगारी का अर्थ ✦


बेरोजगारी उस स्थिति को कहते हैं जब व्यक्ति कार्य करने के योग्य और इच्छुक हो, फिर भी उसे काम प्राप्त न हो।


✦ बेरोजगारी के प्रमुख कारण ✦


  • ✔ तीव्र जनसंख्या वृद्धि
  • ✔ शिक्षा प्रणाली में व्यावहारिक ज्ञान की कमी
  • ✔ औद्योगिक विकास की धीमी गति
  • ✔ कुटीर उद्योगों का पतन
  • ✔ मशीनों और तकनीक का बढ़ता उपयोग
  • ✔ ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित रोजगार अवसर

“रोजगार ही आत्मसम्मान का आधार है।”

✦ बेरोजगारी के दुष्परिणाम ✦


  • ✔ युवाओं में निराशा और हताशा
  • ✔ अपराध और भ्रष्टाचार में वृद्धि
  • ✔ आर्थिक विकास की गति में कमी
  • ✔ सामाजिक असंतोष और असुरक्षा

✦ समस्या के समाधान ✦


  • ✔ जनसंख्या नियंत्रण पर ध्यान
  • ✔ कौशल आधारित और व्यावसायिक शिक्षा
  • ✔ लघु एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा
  • ✔ स्वरोजगार और स्टार्टअप को प्रोत्साहन
  • ✔ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार योजनाएँ

“आत्मनिर्भर युवा ही आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण करते हैं।”

✦ उपसंहार ✦


निष्कर्षतः, बेरोजगारी देश के विकास में एक बड़ी बाधा है। इस समस्या का समाधान सरकार, समाज और युवाओं के संयुक्त प्रयास से ही संभव है। यदि शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया जाए, तो हम एक सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण कर सकते हैं।


साहित्य समाज का पथ-प्रदर्शक है

✦ 4.साहित्य समाज का पथ-प्रदर्शक है ✦


✦ प्रस्तावना ✦


“साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, उसका मार्गदर्शक भी है।”

साहित्य मानव जीवन की अनुभूतियों, भावनाओं और विचारों की सशक्त अभिव्यक्ति है। यह केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज की चेतना का जीवंत स्वरूप है। जिस प्रकार दीपक अंधकार में प्रकाश फैलाकर मार्ग दिखाता है, उसी प्रकार साहित्य समाज को सही दिशा प्रदान करता है। मानव सभ्यता के विकास में साहित्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। यह हमें अतीत से परिचित कराता है, वर्तमान को समझने की दृष्टि देता है और भविष्य के लिए मार्गदर्शन करता है।


✦ साहित्य और समाज का अभिन्न संबंध ✦


“जहाँ श्रेष्ठ साहित्य होता है, वहाँ जागरूक समाज का निर्माण होता है।”

साहित्य और समाज एक-दूसरे के पूरक हैं। समाज की परिस्थितियाँ, संघर्ष, रीति-रिवाज, परंपराएँ और समस्याएँ साहित्य में प्रतिबिंबित होती हैं। लेखक अपने समय की घटनाओं को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करता है। इस प्रकार साहित्य समाज का दर्पण बनकर उसकी वास्तविकता को सामने लाता है। साथ ही यह केवल चित्रण ही नहीं करता, बल्कि समाज को सुधारने और दिशा देने का कार्य भी करता है।

यदि समाज में अन्याय, शोषण या कुरीतियाँ बढ़ती हैं, तो साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से उनका विरोध करता है। इस प्रकार साहित्य समाज को जागृत और सचेत करता है।


✦ नैतिक मूल्यों का संरक्षण ✦


“साहित्य मानवता की आत्मा को प्रकाशित करता है।”

साहित्य हमें सत्य, अहिंसा, प्रेम, करुणा, त्याग और सहानुभूति जैसे उच्च आदर्शों की शिक्षा देता है। महान कवियों और लेखकों की रचनाएँ हमें एक श्रेष्ठ मनुष्य बनने की प्रेरणा देती हैं। रामायण, महाभारत और अन्य महान ग्रंथों ने सदैव नैतिक मूल्यों का प्रचार किया है। इन रचनाओं के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी संस्कारों का संचार होता रहा है।

जब समाज में नैतिक पतन होने लगता है, तब साहित्य ही उसे पुनः सही मार्ग पर लाने का कार्य करता है। इस प्रकार साहित्य समाज का नैतिक मार्गदर्शक बनता है।


✦ सामाजिक सुधार में साहित्य की भूमिका ✦


“कलम की शक्ति तलवार से अधिक प्रभावशाली होती है।”

इतिहास साक्षी है कि साहित्य ने अनेक सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई है। दहेज प्रथा, सती प्रथा, बाल विवाह, छुआछूत और जाति-भेद जैसी बुराइयों के खिलाफ साहित्यकारों ने अपने लेखन के माध्यम से जनचेतना जगाई। उनके विचारों ने समाज को सोचने और बदलने के लिए प्रेरित किया।

सामाजिक सुधार आंदोलनों में साहित्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। लेखकों ने समाज की समस्याओं को उजागर कर समाधान की दिशा भी सुझाई। इस प्रकार साहित्य समाज के परिवर्तन का आधार बना।


✦ राष्ट्रीय चेतना और एकता का विकास ✦


“साहित्य राष्ट्र की चेतना का सशक्त माध्यम है।”

साहित्य ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोगों में देशभक्ति की भावना जागृत की। कवियों और लेखकों की ओजपूर्ण रचनाओं ने जनता में उत्साह और साहस का संचार किया। साहित्य ने राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

आज भी साहित्य के माध्यम से विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के लोग एक सूत्र में बंधते हैं। यह विविधता में एकता का संदेश देता है और राष्ट्र निर्माण में सहायक होता है।


✦ उपसंहार ✦



“श्रेष्ठ साहित्य ही श्रेष्ठ समाज का निर्माण करता है।”

निष्कर्षतः, साहित्य समाज का सच्चा पथ-प्रदर्शक है। यह समाज की कमियों को उजागर करता है और उन्हें दूर करने की प्रेरणा देता है। साहित्य न केवल मनोरंजन करता है, बल्कि शिक्षा, संस्कार और दिशा भी प्रदान करता है। यदि समाज को उन्नति और प्रगति की ओर बढ़ना है, तो उसे श्रेष्ठ साहित्य का अनुसरण करना होगा।

साहित्य की उज्ज्वल किरणें सदैव मानवता को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती रहेंगी। जब तक साहित्य जीवित है, तब तक समाज में चेतना और प्रकाश बना रहेगा।


पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता

✦ 5.पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता ✦


“प्रकृति हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है, इसकी रक्षा करना हमारा प्रथम कर्तव्य है।”

✦ प्रस्तावना ✦

पर्यावरण शब्द का अर्थ है हमारे चारों ओर का प्राकृतिक परिवेश। इसमें वायु, जल, भूमि, वन, पर्वत, नदियाँ, समुद्र, पशु-पक्षी तथा समस्त जीव-जगत शामिल हैं। मानव जीवन पूरी तरह पर्यावरण पर निर्भर है। बिना शुद्ध वायु, स्वच्छ जल और उपजाऊ भूमि के जीवन संभव नहीं है। किंतु आधुनिक युग में औद्योगीकरण, शहरीकरण और बढ़ती जनसंख्या के कारण पर्यावरण का संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है। आज पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है।


✦ पर्यावरण का महत्व ✦


“यदि पृथ्वी सुरक्षित है, तभी मानव का भविष्य सुरक्षित है।”

पर्यावरण हमारे जीवन का आधार है। पेड़-पौधे हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं। नदियाँ और जलस्रोत हमें पीने योग्य जल उपलब्ध कराते हैं। भूमि हमें अन्न देती है, जिससे हमारा जीवन चलता है। प्राकृतिक संसाधन जैसे खनिज, वन और जल हमारी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करते हैं।

यदि पर्यावरण संतुलित रहेगा, तो जलवायु भी संतुलित रहेगी। मौसम चक्र नियमित रहेगा और प्राकृतिक आपदाओं की संभावना कम होगी। इस प्रकार पर्यावरण न केवल जीवनदाता है, बल्कि विकास का आधार भी है।


✦ पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारण ✦


  • ✔ उद्योगों से निकलने वाला धुआँ और रासायनिक अपशिष्ट
  • ✔ वाहनों से निकलने वाली जहरीली गैसें
  • ✔ प्लास्टिक और पॉलीथीन का अत्यधिक उपयोग
  • ✔ वनों की अंधाधुंध कटाई
  • ✔ जल स्रोतों में कचरे का निस्तारण
  • ✔ बढ़ती जनसंख्या और अनियोजित शहरीकरण

इन कारणों से वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और भूमि प्रदूषण तेजी से बढ़ रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग, ओजोन परत का क्षरण और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं।


✦ पर्यावरण असंतुलन के दुष्परिणाम ✦


“जब प्रकृति का संतुलन बिगड़ता है, तब जीवन संकट में पड़ जाता है।”

पर्यावरण असंतुलन के कारण तापमान में वृद्धि हो रही है। हिमनद पिघल रहे हैं और समुद्र का स्तर बढ़ रहा है। अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़ और तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ती जा रही हैं। जैव विविधता का ह्रास हो रहा है, अनेक प्रजातियाँ विलुप्त हो रही हैं।

प्रदूषित वायु और जल के कारण मनुष्य अनेक बीमारियों का शिकार हो रहा है। श्वसन संबंधी रोग, त्वचा रोग और जलजनित रोग बढ़ रहे हैं। यदि समय रहते उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।


✦ पर्यावरण संरक्षण के उपाय ✦


  • ✔ अधिक से अधिक वृक्षारोपण और वनों का संरक्षण
  • ✔ प्लास्टिक का कम उपयोग और कपड़े/जूट के थैलों का प्रयोग
  • ✔ जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन
  • ✔ ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों जैसे सौर और पवन ऊर्जा का उपयोग
  • ✔ कचरे का पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग)
  • ✔ पर्यावरण शिक्षा और जागरूकता अभियान

“एक वृक्ष हजारों जीवनों को संजीवनी देता है।”

यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर छोटे-छोटे कदम उठाए, तो बड़ा परिवर्तन संभव है। हमें जल और बिजली की बचत करनी चाहिए, स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनानी चाहिए।


✦ सरकार और नागरिकों की भूमिका ✦

पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। सरकार को कठोर पर्यावरण कानून बनाने और उनका पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन करना चाहिए।

नागरिकों को भी पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनना होगा। वृक्षारोपण अभियान, स्वच्छता अभियान और जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेकर हम सकारात्मक योगदान दे सकते हैं।


✦ उपसंहार ✦


“आज प्रकृति को बचाएँगे, तभी आने वाली पीढ़ियाँ मुस्कुराएँगी।”

निष्कर्षतः, पर्यावरण संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि हमने अभी से सतर्कता नहीं बरती, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा। हमें विकास और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करना होगा। पर्यावरण की रक्षा करना ही सच्चे अर्थों में मानवता की सेवा है। सामूहिक प्रयासों और जागरूकता के माध्यम से हम अपनी पृथ्वी को सुरक्षित और सुंदर बना सकते हैं।

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