भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। यह केवल शासन चलाने का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि भारत के लोकतंत्र, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की मूल भावना का आधार भी है। संविधान को विभिन्न भागों (Parts) में विभाजित किया गया है ताकि शासन के प्रत्येक क्षेत्र का व्यवस्थित वर्णन किया जा सके।
भाग V (Part V) भारतीय संविधान का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है क्योंकि इसमें भारत की संघ सरकार (Union Government) की संरचना, शक्तियाँ, कार्य, अधिकार तथा उत्तरदायित्व का विस्तृत वर्णन किया गया है।
इस भाग में अनुच्छेद 52 से 151 तक के प्रावधान शामिल हैं। इसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद, संसद, सर्वोच्च न्यायालय तथा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों एवं संस्थाओं का वर्णन किया गया है।
भाग V का उद्देश्य
भारतीय संविधान के निर्माताओं ने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली को स्पष्ट, उत्तरदायी तथा लोकतांत्रिक बनाने के उद्देश्य से भाग V को संविधान में सम्मिलित किया। इस भाग के माध्यम से यह निर्धारित किया गया है कि भारत की कार्यपालिका कैसे कार्य करेगी, संसद कानून कैसे बनाएगी, सर्वोच्च न्यायालय संविधान की रक्षा कैसे करेगा तथा सार्वजनिक धन का लेखा परीक्षण किस प्रकार किया जाएगा।
- संघ की कार्यपालिका का गठन।
- राष्ट्रपति की संवैधानिक स्थिति।
- प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद की भूमिका।
- महान्यायवादी के कार्य एवं अधिकार।
- संघ सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था।
भाग V का दायरा (Scope)
| अध्याय | अनुच्छेद | विषय |
|---|---|---|
| Chapter I | 52–78 | संघ की कार्यपालिका |
| Chapter II | 79–122 | संसद |
| Chapter III | 123 | राष्ट्रपति की अध्यादेश शक्ति |
| Chapter IV | 124–147 | सर्वोच्च न्यायालय |
| Chapter V | 148–151 | नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) |
संघ की कार्यपालिका (Union Executive)
संघ की कार्यपालिका भारत सरकार का वह भाग है जो देश का प्रशासन चलाता है। संसदीय शासन प्रणाली में राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होते हैं, जबकि प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख होते हैं।
संघ की कार्यपालिका में निम्नलिखित पद सम्मिलित हैं—
- राष्ट्रपति
- उपराष्ट्रपति
- प्रधानमंत्री
- मंत्रिपरिषद
- भारत के महान्यायवादी
राष्ट्रपति (Articles 52–62)
अनुच्छेद 52 – भारत में एक राष्ट्रपति होगा
अनुच्छेद 52 के अनुसार भारत में एक राष्ट्रपति होगा। राष्ट्रपति भारत के प्रथम नागरिक तथा संघ के संवैधानिक प्रमुख होते हैं।
अनुच्छेद 53 – संघ की कार्यपालिका शक्ति
संघ की समस्त कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होती है। यद्यपि राष्ट्रपति अधिकांश कार्य प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद की सलाह पर करते हैं।
अनुच्छेद 54 – राष्ट्रपति का निर्वाचन
भारत के राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा नहीं किया जाता। उनका निर्वाचन एक विशेष निर्वाचक मंडल (Electoral College) द्वारा किया जाता है।
निर्वाचक मंडल में शामिल सदस्य
- लोकसभा के निर्वाचित सदस्य।
- राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य।
- राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य।
- दिल्ली एवं पुडुचेरी विधानसभा के निर्वाचित सदस्य।
अनुच्छेद 55 – निर्वाचन की पद्धति
राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली तथा एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) द्वारा गुप्त मतदान से होता है।
अनुच्छेद 56 – राष्ट्रपति का कार्यकाल
राष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी वे नए राष्ट्रपति के पदभार ग्रहण करने तक अपने पद पर बने रहते हैं।
अनुच्छेद 58 – राष्ट्रपति बनने की योग्यता
- भारत का नागरिक होना चाहिए।
- न्यूनतम आयु 35 वर्ष होनी चाहिए।
- लोकसभा का सदस्य बनने की योग्यता हो।
- लाभ के पद पर न हो।
अनुच्छेद 60 – राष्ट्रपति की शपथ
राष्ट्रपति को भारत के मुख्य न्यायाधीश शपथ दिलाते हैं। यदि मुख्य न्यायाधीश उपलब्ध न हों तो सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश शपथ दिलाते हैं।
अनुच्छेद 61 – महाभियोग
यदि राष्ट्रपति संविधान का उल्लंघन करते हैं, तो उनके विरुद्ध संसद द्वारा महाभियोग चलाया जा सकता है।
राष्ट्रपति की शक्तियाँ (Powers of the President)
भारतीय संविधान ने राष्ट्रपति को अनेक महत्वपूर्ण शक्तियाँ प्रदान की हैं। यद्यपि अधिकांश शक्तियों का प्रयोग राष्ट्रपति प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद की सलाह पर करते हैं, फिर भी संवैधानिक दृष्टि से सभी कार्यपालिका शक्तियाँ राष्ट्रपति में निहित होती हैं।
1. कार्यपालिका शक्तियाँ
- प्रधानमंत्री की नियुक्ति करना।
- प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रियों की नियुक्ति करना।
- राज्यपालों की नियुक्ति करना।
- भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति करना।
- भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नियुक्ति करना।
- मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करना।
- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति करना।
- सर्वोच्च एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति करना।
2. विधायी शक्तियाँ
- संसद का सत्र बुलाना।
- संसद का सत्रावसान करना।
- लोकसभा को भंग करना।
- संसद के संयुक्त अधिवेशन को बुलाना।
- विधेयकों पर स्वीकृति प्रदान करना।
- संसद को संदेश भेजना।
- संसद के प्रथम सत्र को संबोधित करना।
3. वित्तीय शक्तियाँ
- वार्षिक बजट राष्ट्रपति की अनुशंसा पर संसद में प्रस्तुत किया जाता है।
- धन विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा के बिना प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
- भारत की आकस्मिक निधि पर नियंत्रण राष्ट्रपति के माध्यम से होता है।
4. न्यायिक शक्तियाँ
अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति को क्षमादान (Pardon) तथा दंड में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है।
- क्षमादान (Pardon)
- दंड स्थगन (Reprieve)
- दंड में राहत (Respite)
- दंड में कमी (Remission)
- दंड परिवर्तन (Commutation)
उपराष्ट्रपति (Articles 63–71)
उपराष्ट्रपति भारत का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। संविधान के अनुच्छेद 63 से 71 तक उपराष्ट्रपति के पद, चुनाव, कार्यकाल एवं शक्तियों का वर्णन किया गया है।
अनुच्छेद 63
भारत में एक उपराष्ट्रपति होगा।
उपराष्ट्रपति का निर्वाचन
उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित एवं मनोनीत सदस्य मिलकर करते हैं।
कार्यकाल
उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है।
मुख्य कार्य
- राज्यसभा के पदेन सभापति (Ex-officio Chairman) होते हैं।
- राष्ट्रपति के पद रिक्त होने पर कार्यवाहक राष्ट्रपति का कार्य करते हैं।
- राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उनके कार्यों का निर्वहन करते हैं।
प्रधानमंत्री (Prime Minister)
भारत की संसदीय शासन प्रणाली में प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख (Real Executive) होते हैं। राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होते हैं, जबकि शासन का वास्तविक संचालन प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद द्वारा किया जाता है।
प्रधानमंत्री की नियुक्ति
राष्ट्रपति लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल अथवा गठबंधन के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं।
प्रधानमंत्री के प्रमुख कार्य
- मंत्रिपरिषद का गठन करना।
- मंत्रियों के विभागों का वितरण करना।
- सरकारी नीतियों का निर्माण करना।
- राष्ट्रपति को सलाह देना।
- संसद में सरकार का नेतृत्व करना।
- देश के प्रशासन का संचालन करना।
- कैबिनेट बैठकों की अध्यक्षता करना।
मंत्रिपरिषद (Articles 74–75)
अनुच्छेद 74
राष्ट्रपति की सहायता एवं सलाह देने के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद होगी।
अनुच्छेद 75
प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर होती है।
सामूहिक उत्तरदायित्व
मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। यदि लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव पारित कर देती है तो पूरी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है।
मंत्रियों के प्रकार
- कैबिनेट मंत्री
- राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
- राज्य मंत्री
भारत के महान्यायवादी (Article 76)
महान्यायवादी (Attorney General of India) भारत सरकार के सर्वोच्च विधिक अधिकारी होते हैं।
नियुक्ति
महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
योग्यता
वह व्यक्ति सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता रखता हो।
कार्य
- भारत सरकार को कानूनी सलाह देना।
- सर्वोच्च न्यायालय में सरकार का पक्ष रखना।
- राष्ट्रपति द्वारा सौंपे गए विधिक कार्यों का निष्पादन करना।
- संसद की कार्यवाही में भाग ले सकते हैं, लेकिन मतदान नहीं कर सकते।
अनुच्छेद 77 – भारत सरकार के कार्यों का संचालन
भारत सरकार के सभी कार्य राष्ट्रपति के नाम से किए जाते हैं। कार्यों के संचालन के लिए राष्ट्रपति नियम बनाते हैं।
अनुच्छेद 78 – प्रधानमंत्री के कर्तव्य
- राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद के सभी निर्णयों की जानकारी देना।
- राष्ट्रपति द्वारा मांगी गई सूचना उपलब्ध कराना।
- ऐसे मामलों को मंत्रिपरिषद के समक्ष रखना जिनकी मांग राष्ट्रपति करें।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण अनुच्छेद
| अनुच्छेद | विषय |
|---|---|
| 52 | राष्ट्रपति |
| 53 | कार्यपालिका शक्ति |
| 54 | राष्ट्रपति का निर्वाचन |
| 55 | निर्वाचन पद्धति |
| 56 | कार्यकाल |
| 58 | योग्यता |
| 60 | शपथ |
| 61 | महाभियोग |
| 63 | उपराष्ट्रपति |
| 72 | क्षमादान |
| 74 | मंत्रिपरिषद |
| 75 | मंत्रियों की नियुक्ति |
| 76 | महान्यायवादी |
| 77 | भारत सरकार के कार्य |
| 78 | प्रधानमंत्री के कर्तव्य |
भारतीय संविधान भाग V – संसद (अनुच्छेद 79 से 122)
भारतीय संविधान के भाग V के अध्याय II में संसद से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं। अनुच्छेद 79 से 122 तक भारतीय संसद की संरचना, सदनों, सदस्यों की योग्यता, कार्यकाल, शक्तियों, विधायी प्रक्रिया तथा संसदीय विशेषाधिकारों का वर्णन किया गया है।
अनुच्छेद 79 – संसद का गठन
अनुच्छेद 79 के अनुसार भारत के लिए एक संसद होगी। संसद तीन अंगों से मिलकर बनती है—
- राष्ट्रपति
- राज्यसभा
- लोकसभा
यद्यपि राष्ट्रपति संसद का सदस्य नहीं होता, फिर भी वह संसद का एक अभिन्न अंग माना जाता है।
भारतीय संसद के सदन
| सदन | अन्य नाम | विशेषता |
|---|---|---|
| राज्यसभा | उच्च सदन | स्थायी सदन |
| लोकसभा | निचला सदन | जनता द्वारा चुना गया सदन |
राज्यसभा (अनुच्छेद 80)
राज्यसभा संसद का उच्च सदन है। इसे राज्यों की परिषद (Council of States) भी कहा जाता है। यह एक स्थायी सदन है जिसे कभी भंग नहीं किया जाता।
राज्यसभा की संरचना
- अधिकतम सदस्य संख्या – 250
- 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं।
- अन्य सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
नामित सदस्य
राष्ट्रपति ऐसे व्यक्तियों को नामित करते हैं जिन्होंने साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया हो।
राज्यसभा का कार्यकाल
राज्यसभा एक स्थायी सदन है। इसके सदस्य छह वर्ष के लिए चुने जाते हैं। प्रत्येक दो वर्ष बाद इसके एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
लोकसभा (अनुच्छेद 81)
लोकसभा संसद का निम्न सदन है। इसे जनता का सदन कहा जाता है क्योंकि इसके सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं।
लोकसभा की विशेषताएँ
- सदस्य प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा चुने जाते हैं।
- सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष होता है।
- राष्ट्रपति लोकसभा को समय से पहले भंग कर सकते हैं।
- धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जाता है।
अनुच्छेद 83 – संसद के सदनों की अवधि
| सदन | कार्यकाल |
|---|---|
| राज्यसभा | स्थायी सदन |
| लोकसभा | 5 वर्ष |
अनुच्छेद 84 – संसद सदस्य बनने की योग्यता
- भारत का नागरिक होना चाहिए।
- राज्यसभा सदस्य के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष।
- लोकसभा सदस्य के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष।
- संसद द्वारा निर्धारित अन्य योग्यताएँ पूरी करनी चाहिए।
अनुच्छेद 85 – संसद का सत्र
राष्ट्रपति संसद का सत्र बुलाते हैं। संसद के दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए।
संसद के प्रमुख सत्र
- बजट सत्र
- मानसून सत्र
- शीतकालीन सत्र
संसद के अधिकारी
लोकसभा अध्यक्ष (Speaker)
- लोकसभा की कार्यवाही का संचालन करते हैं।
- अनुशासन बनाए रखते हैं।
- धन विधेयक का अंतिम निर्णय करते हैं।
- निर्णायक मत देने का अधिकार रखते हैं।
राज्यसभा सभापति
भारत के उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं।
अनुच्छेद 93 – लोकसभा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष
लोकसभा अपने सदस्यों में से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करती है।
संसद के प्रमुख कार्य
- कानून बनाना।
- सरकार पर नियंत्रण रखना।
- बजट पारित करना।
- राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करना।
- संविधान संशोधन करना।
- जनता की समस्याओं को उठाना।
विधेयक के प्रकार
| विधेयक | विवरण |
|---|---|
| साधारण विधेयक | सामान्य कानून बनाने हेतु |
| धन विधेयक | कर और सरकारी धन से संबंधित |
| वित्त विधेयक | वित्तीय मामलों से संबंधित |
| संविधान संशोधन विधेयक | संविधान में परिवर्तन हेतु |
अनुच्छेद 100 – मतदान
संसद के प्रत्येक सदन में निर्णय उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से लिए जाते हैं।
अनुच्छेद 105 – संसदीय विशेषाधिकार
संसद के सदस्यों और समितियों को कुछ विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं जिन्हें संसदीय विशेषाधिकार कहा जाता है।
- संसद में स्वतंत्र रूप से बोलने की स्वतंत्रता।
- संसदीय कार्यवाही के संबंध में न्यायालय में कार्रवाई से सुरक्षा।
अनुच्छेद 110 – धन विधेयक
धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।
- लोकसभा अध्यक्ष यह प्रमाणित करते हैं कि कोई विधेयक धन विधेयक है।
- राज्यसभा केवल सुझाव दे सकती है।
- राज्यसभा को 14 दिनों के भीतर विधेयक वापस करना होता है।
अनुच्छेद 112 – वार्षिक वित्तीय विवरण
भारत का वार्षिक बजट राष्ट्रपति की अनुशंसा पर संसद में प्रस्तुत किया जाता है। इसे वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual Financial Statement) कहा जाता है।
महत्वपूर्ण अनुच्छेद (Revision Table)
| अनुच्छेद | विषय |
|---|---|
| 79 | संसद का गठन |
| 80 | राज्यसभा |
| 81 | लोकसभा |
| 83 | कार्यकाल |
| 84 | योग्यता |
| 85 | संसद का सत्र |
| 93 | लोकसभा अध्यक्ष |
| 100 | मतदान |
| 105 | विशेषाधिकार |
| 110 | धन विधेयक |
| 112 | बजट |
अभ्यास प्रश्न (PYQ)
- भारतीय संसद का गठन किस अनुच्छेद में किया गया है?
- राज्यसभा को स्थायी सदन क्यों कहा जाता है?
- धन विधेयक किस सदन में प्रस्तुत किया जाता है?
- लोकसभा का सामान्य कार्यकाल कितना होता है?
- संसदीय विशेषाधिकार किस अनुच्छेद में दिए गए हैं?
भारतीय संविधान भाग V – अध्यादेश एवं सर्वोच्च न्यायालय
अनुच्छेद 123 – राष्ट्रपति की अध्यादेश शक्ति (Ordinance Power)
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान करता है। जब संसद का कोई भी सदन सत्र में न हो और ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो जाए जिसमें तुरंत कानून बनाना आवश्यक हो, तब राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकते हैं।
अध्यादेश की मुख्य विशेषताएँ
- अध्यादेश राष्ट्रपति द्वारा जारी किया जाता है।
- यह संसद द्वारा बनाए गए कानून के समान प्रभाव रखता है।
- यह अस्थायी कानून होता है।
- संसद के पुनः सत्र प्रारंभ होने के बाद इसे दोनों सदनों के सामने रखा जाता है।
- यदि संसद इसे पारित नहीं करती है तो यह छह सप्ताह बाद समाप्त हो जाता है।
अध्यादेश जारी करने की शर्तें
- संसद का कोई भी सदन सत्र में नहीं होना चाहिए।
- तत्काल कानून बनाने की आवश्यकता होनी चाहिए।
- राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं।
सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
सर्वोच्च न्यायालय भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है। यह संविधान का संरक्षक, मौलिक अधिकारों का रक्षक तथा देश का अंतिम अपीलीय न्यायालय है।
सर्वोच्च न्यायालय से संबंधित प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124 से 147 तक दिए गए हैं।
अनुच्छेद 124 – सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना
अनुच्छेद 124 के अनुसार भारत में एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा संसद द्वारा निर्धारित संख्या में अन्य न्यायाधीश होंगे।
सर्वोच्च न्यायालय की संरचना
| पद | विवरण |
|---|---|
| मुख्य न्यायाधीश | Chief Justice of India |
| अन्य न्यायाधीश | संसद द्वारा निर्धारित संख्या |
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
न्यायाधीश बनने की योग्यता
- भारत का नागरिक होना चाहिए।
- कम से कम 5 वर्ष तक किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो।
- या 10 वर्ष तक किसी उच्च न्यायालय में अधिवक्ता रहा हो।
- या राष्ट्रपति की दृष्टि में प्रतिष्ठित विधिवेत्ता हो।
न्यायाधीशों का कार्यकाल
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु तक अपने पद पर बने रहते हैं।
अनुच्छेद 125 – वेतन और भत्ते
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तों का निर्धारण संसद द्वारा किया जाता है।
अनुच्छेद 126 – कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश
जब मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो या वे कार्य करने में असमर्थ हों, तब राष्ट्रपति किसी अन्य न्यायाधीश को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त कर सकते हैं।
अनुच्छेद 127 – तदर्थ न्यायाधीश
यदि सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या कम हो जाए तो भारत के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति की अनुमति से उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को तदर्थ न्यायाधीश के रूप में नियुक्त कर सकते हैं।
अनुच्छेद 128 – सेवानिवृत्त न्यायाधीश
सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को पुनः सर्वोच्च न्यायालय में बैठने के लिए आमंत्रित कर सकता है।
अनुच्छेद 129 – अभिलेख न्यायालय (Court of Record)
सर्वोच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय है। इसके निर्णयों को प्रमाणिक माना जाता है और इसे न्यायालय की अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति प्राप्त है।
अभिलेख न्यायालय की शक्तियाँ
- अपने निर्णयों को सुरक्षित रखना।
- न्यायालय की अवमानना करने वालों को दंडित करना।
सर्वोच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र
| क्षेत्राधिकार | अनुच्छेद |
|---|---|
| मूल क्षेत्राधिकार | 131 |
| अपीलीय क्षेत्राधिकार | 132-136 |
| परामर्शी क्षेत्राधिकार | 143 |
| पुनर्विचार शक्ति | 137 |
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
- अध्यादेश शक्ति – अनुच्छेद 123
- सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना – अनुच्छेद 124
- सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्ति आयु – 65 वर्ष
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति आयु – 62 वर्ष
- सर्वोच्च न्यायालय – संविधान का संरक्षक
सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियाँ एवं अधिकार क्षेत्र (अनुच्छेद 130–147)
अनुच्छेद 130 – सर्वोच्च न्यायालय का स्थान
अनुच्छेद 130 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य स्थान दिल्ली में होगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति की स्वीकृति से अन्य स्थान पर भी सर्वोच्च न्यायालय की बैठक आयोजित कर सकते हैं।
अनुच्छेद 131 – मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction)
सर्वोच्च न्यायालय को कुछ मामलों में सीधे सुनवाई करने का अधिकार प्राप्त है। इसे मूल क्षेत्राधिकार कहा जाता है।
इसके अंतर्गत आने वाले विवाद
- केंद्र सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच विवाद।
- दो या दो से अधिक राज्यों के बीच विवाद।
- संवैधानिक अधिकारों से संबंधित संघीय विवाद।
अनुच्छेद 132 – संवैधानिक मामलों में अपील
यदि किसी मामले में संविधान की व्याख्या से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्पन्न होता है, तो उच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है।
अनुच्छेद 133 – दीवानी मामलों में अपील
उच्च न्यायालय के दीवानी मामलों के निर्णयों के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है।
अनुच्छेद 134 – आपराधिक मामलों में अपील
आपराधिक मामलों में उच्च न्यायालय के निर्णयों के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में अपील की व्यवस्था अनुच्छेद 134 में की गई है।
अनुच्छेद 136 – विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition)
अनुच्छेद 136 सर्वोच्च न्यायालय को विशेष अनुमति द्वारा किसी भी न्यायालय या अधिकरण के निर्णय के विरुद्ध अपील सुनने की विशेष शक्ति प्रदान करता है।
- यह सर्वोच्च न्यायालय की विवेकाधीन शक्ति है।
- यह भारत के लगभग सभी न्यायिक एवं अर्ध-न्यायिक निर्णयों पर लागू हो सकती है।
अनुच्छेद 137 – पुनर्विचार की शक्ति (Review Power)
सर्वोच्च न्यायालय अपने द्वारा दिए गए किसी निर्णय या आदेश का पुनर्विचार कर सकता है।
पुनर्विचार के कारण
- निर्णय में स्पष्ट त्रुटि।
- नए महत्वपूर्ण तथ्य सामने आना।
- न्याय के हित में आवश्यक होना।
अनुच्छेद 138 – सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का विस्तार
संसद कानून बनाकर सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का विस्तार कर सकती है।
अनुच्छेद 139 – कुछ रिट जारी करने की शक्ति
संसद सर्वोच्च न्यायालय को अतिरिक्त रिट जारी करने की शक्ति प्रदान कर सकती है।
अनुच्छेद 141 – सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित कानून
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित कानून भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होता है।
अनुच्छेद 141 न्यायिक एकरूपता (Uniformity of Law) सुनिश्चित करता है।
अनुच्छेद 142 – पूर्ण न्याय करने की शक्ति
सर्वोच्च न्यायालय किसी भी मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक आदेश जारी कर सकता है।
यह शक्ति न्यायालय को विशेष परिस्थितियों में न्याय सुनिश्चित करने में सहायता करती है।
अनुच्छेद 143 – राष्ट्रपति का परामर्श
राष्ट्रपति किसी महत्वपूर्ण कानूनी या संवैधानिक प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से सलाह मांग सकते हैं।
परामर्श की विशेषताएँ
- राष्ट्रपति प्रश्न सर्वोच्च न्यायालय को भेज सकते हैं।
- सर्वोच्च न्यायालय अपनी सलाह दे सकता है।
- यह सलाह राष्ट्रपति पर बाध्यकारी नहीं होती।
अनुच्छेद 144 – सभी प्राधिकरण सर्वोच्च न्यायालय की सहायता करेंगे
भारत के सभी नागरिक और न्यायिक प्राधिकारी सर्वोच्च न्यायालय की सहायता करने के लिए बाध्य हैं।
अनुच्छेद 145 – सर्वोच्च न्यायालय के नियम
सर्वोच्च न्यायालय अपनी कार्यप्रणाली और प्रक्रिया के लिए नियम बना सकता है।
अनुच्छेद 146 – सर्वोच्च न्यायालय के कर्मचारी
सर्वोच्च न्यायालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति तथा सेवा शर्तों से संबंधित प्रावधान अनुच्छेद 146 में दिए गए हैं।
अनुच्छेद 147 – व्याख्या
अनुच्छेद 147 संविधान में प्रयुक्त कुछ शब्दों और अभिव्यक्तियों की व्याख्या से संबंधित है।
न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review)
न्यायिक पुनरावलोकन सर्वोच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण शक्ति है जिसके अंतर्गत न्यायालय संसद और राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए कानूनों की संवैधानिकता की जांच करता है।
यदि कोई कानून संविधान के मूल प्रावधानों के विरुद्ध पाया जाता है तो न्यायालय उसे अमान्य घोषित कर सकता है।
मूल संरचना सिद्धांत (Basic Structure Doctrine)
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, लेकिन संविधान की मूल संरचना को नष्ट नहीं कर सकती।
मूल संरचना के तत्व
- संविधान की सर्वोच्चता।
- लोकतांत्रिक व्यवस्था।
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता।
- मौलिक अधिकार।
- कानून का शासन।
महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय
| मामला | वर्ष | मुख्य निर्णय |
|---|---|---|
| केशवानंद भारती मामला | 1973 | मूल संरचना सिद्धांत |
| गोलकनाथ मामला | 1967 | मौलिक अधिकारों की सुरक्षा |
| मिनर्वा मिल्स मामला | 1980 | संविधान संशोधन की सीमा |
भारतीय संविधान भाग V – महत्वपूर्ण प्रश्न, MCQ एवं FAQ
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
प्रश्न 1. भारतीय संविधान के भाग V में किसका वर्णन किया गया है?
- A) राज्य सरकार
- B) संघ सरकार
- C) पंचायत व्यवस्था
- D) आपातकाल
उत्तर: B) संघ सरकार
प्रश्न 2. राष्ट्रपति का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
- A) अनुच्छेद 50
- B) अनुच्छेद 52
- C) अनुच्छेद 54
- D) अनुच्छेद 60
उत्तर: B) अनुच्छेद 52
प्रश्न 3. राष्ट्रपति की अध्यादेश शक्ति किस अनुच्छेद में दी गई है?
- A) अनुच्छेद 72
- B) अनुच्छेद 110
- C) अनुच्छेद 123
- D) अनुच्छेद 143
उत्तर: C) अनुच्छेद 123
प्रश्न 4. सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना किस अनुच्छेद में है?
- A) अनुच्छेद 124
- B) अनुच्छेद 131
- C) अनुच्छेद 136
- D) अनुच्छेद 141
उत्तर: A) अनुच्छेद 124
प्रश्न 5. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु कितनी है?
- A) 60 वर्ष
- B) 62 वर्ष
- C) 65 वर्ष
- D) 70 वर्ष
उत्तर: C) 65 वर्ष
भारतीय संविधान भाग V से संबंधित FAQ
प्रश्न 1. भारतीय संविधान का भाग V किससे संबंधित है?
उत्तर: भारतीय संविधान का भाग V संघ सरकार से संबंधित है। इसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संसद, सर्वोच्च न्यायालय और CAG के प्रावधान दिए गए हैं।
प्रश्न 2. भारत का संवैधानिक प्रमुख कौन होता है?
उत्तर: भारत का राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होता है।
प्रश्न 3. भारत का वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख कौन होता है?
उत्तर: भारत का प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख होता है।
प्रश्न 4. राष्ट्रपति का चुनाव कौन करता है?
उत्तर: राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है जिसमें संसद के निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
प्रश्न 5. संसद के कितने अंग होते हैं?
उत्तर: संसद के तीन अंग होते हैं – राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा।
प्रश्न 6. राज्यसभा को स्थायी सदन क्यों कहा जाता है?
उत्तर: क्योंकि राज्यसभा कभी भंग नहीं होती और इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष बाद सेवानिवृत्त होते हैं।
प्रश्न 7. धन विधेयक कहाँ प्रस्तुत किया जाता है?
उत्तर: धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।
प्रश्न 8. सर्वोच्च न्यायालय संविधान का संरक्षक क्यों कहलाता है?
उत्तर: क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय संविधान की व्याख्या करता है और संविधान के विरुद्ध कानूनों को अमान्य घोषित कर सकता है।
भाग V के महत्वपूर्ण तथ्य (One Liner Notes)
- राष्ट्रपति – अनुच्छेद 52
- संघ की कार्यपालिका शक्ति – अनुच्छेद 53
- राष्ट्रपति का निर्वाचन – अनुच्छेद 54
- राष्ट्रपति की योग्यता – अनुच्छेद 58
- राष्ट्रपति का महाभियोग – अनुच्छेद 61
- उपराष्ट्रपति – अनुच्छेद 63
- राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति – अनुच्छेद 72
- मंत्रिपरिषद – अनुच्छेद 74
- प्रधानमंत्री एवं मंत्री – अनुच्छेद 75
- महान्यायवादी – अनुच्छेद 76
- संसद – अनुच्छेद 79
- राज्यसभा – अनुच्छेद 80
- लोकसभा – अनुच्छेद 81
- धन विधेयक – अनुच्छेद 110
- बजट – अनुच्छेद 112
- अध्यादेश – अनुच्छेद 123
- सर्वोच्च न्यायालय – अनुच्छेद 124
- विशेष अनुमति याचिका – अनुच्छेद 136
- पुनर्विचार शक्ति – अनुच्छेद 137
- सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय बाध्यकारी – अनुच्छेद 141
- पूर्ण न्याय की शक्ति – अनुच्छेद 142
- राष्ट्रपति का परामर्श – अनुच्छेद 143
- CAG – अनुच्छेद 148
भारतीय संविधान के बारे में महान नेताओं के विचार
भारतीय संविधान के निर्माण और महत्व के बारे में अनेक महान नेताओं एवं संविधान निर्माताओं ने अपने विचार व्यक्त किए हैं। उनके विचार संविधान की भावना और महत्व को समझने में सहायता करते हैं।
| व्यक्ति | संविधान के बारे में विचार | महत्व |
|---|---|---|
| डॉ. भीमराव अंबेडकर | “संविधान केवल वकीलों का दस्तावेज नहीं है, यह जीवन का एक माध्यम है।” | संविधान को सामाजिक न्याय और समानता का आधार माना। |
| डॉ. राजेंद्र प्रसाद | “संविधान देश की जनता की इच्छा और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।” | संविधान को लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार बताया। |
| जवाहरलाल नेहरू | “संविधान का उद्देश्य भारत के लोगों के लिए न्याय, स्वतंत्रता और समानता सुनिश्चित करना है।” | संविधान की मूल भावना पर जोर दिया। |
| सरदार वल्लभभाई पटेल | “एक मजबूत संविधान ही एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।” | राष्ट्रीय एकता और अखंडता पर बल दिया। |
| के. एम. मुंशी | “भारतीय संविधान हमारी राष्ट्रीय स्वतंत्रता का कानूनी रूप है।” | स्वतंत्र भारत की संवैधानिक व्यवस्था को स्पष्ट किया। |
| अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर | “भारतीय संविधान विश्व के सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक दस्तावेजों में से एक है।” | संविधान की व्यापकता और महत्व को बताया। |
| महात्मा गांधी | “मैं ऐसे संविधान के लिए प्रयास करूंगा जिसमें सबसे कमजोर व्यक्ति को भी न्याय और अवसर मिले।” | अंत्योदय और समान अवसर की भावना। |
| डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन | “लोकतंत्र की सफलता नागरिकों के चरित्र और संविधान के सम्मान पर निर्भर करती है।” | नागरिक जिम्मेदारी पर बल दिया। |
निष्कर्ष (Conclusion)
भारतीय संविधान का भाग V संघ सरकार की पूरी संवैधानिक संरचना को स्पष्ट करता है। राष्ट्रपति से लेकर सर्वोच्च न्यायालय और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक तक सभी संस्थाएँ भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
UPSC, SSC, PCS, बैंकिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भाग V के अनुच्छेद 52 से 151 अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन अनुच्छेदों का अध्ययन संविधान की समझ को मजबूत करता है।
